टेस्ट श्रृंखला का विश्लेषण

टेस्ट श्रृंखला में 4-1 से मेजबानों से मात खाने के बाद, लोगों ने अब यह विश्लेषण शुरू कर दिया है इस हार का जिम्मेदार कौन है. कप्तान विराट कोहली को हार के लिए दोषी ठहराना काफी गलत होगा क्यूंकि एक बल्लेबाज के तौर पर उन्होने हर मुकाबले में खुद को साबित किया है. एक खिलाड़ी के तौर पर नहीं पर क्या एक कप्तान के तौर पर विराट गलत थे?

जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं क्रिकेटप्रेमी और अन्य लोगों ने टेस्ट श्रृंखला का विश्लेषण शुरू कर दिया है. लोगों ने कई परेशानियों को जाहिर किया. भारतीय पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि कई बार गलत प्लेयिंग एलेवन को खिलाया गया, गलत खिलाड़ियों को अनुचित समर्थन मिला, कई बार फील्डिंग और गेंदबाजी में अनुचित बदलाव किए गये. सुनील गावस्कर का मानना है कि भारतीय कप्तान विराट कोहली को अभी और सीखने की जरूरत है.

एक इंटरव्यू के दौरान जब गावस्कर से भारतीय टीम की हार पर विचार मांगे गए तो उन्होने कहा कि यह हर अप्रत्याशित थी. भारतीय टीम रेड बॉल क्रिकेट के लिए तैयार नहीं था. यह दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर भी हुआ था और इंग्लैंड में भी यही हुआ. उन्होने कहा कि, ” अगर आप तैयारी करने में असमर्थ हैं, तब आप हारने की तैयारी करें.”

अभ्यास मुख्य है

गावस्कर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाला हर एक व्यक्ति जानता है कि अभ्यास खेल से पहले काफी अहम है. गावस्कर ने कहा कि यह सब उन्हे आश्चर्य चकित नहीं कर रहा पर वे चाहेंगे कि ऑस्ट्रेलिया के दौरे के वक़्त ऐसा न हो.

विराट की कप्तानी पर विचार मांगने पर गावस्कर ने कहा कि विराट को अभी कुछ सीखना है. हमने पहले यह दक्षिण अफ्रीका में देखा था फिर इंग्लैंड में भी,विराट के लिए हुए छोटे छोटे फैसलों और किए गए छोटे बदलावों के कारण, काफी बड़ा अंतर आ जाता है. हालांकि विराट के पास कप्तानी का अनुभव नहीं है और यह उनकी नीतियों में साफ देखा जा सकता है.

इन सबके पीछे का कारण है कि जब विराट को कप्तानी दी गई तब से उनके पास बहुतायत एशिया की गृह पिचों का ही अनुभव है. अब उन्हे भारत के बाहर की पिचों पर भी अनुभव बटोरना होगा, और आशा की जा सकती है कि ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर वे काफी कुछ सीखकर रणनीति बनाएंगे.

मैनेजमेंट का विवाद

गावस्कर ने कहा कि मैनेजमेंट को पूरी तरह ईमानदार होना चाहिए और प्लेयिंग एलेवन में फर्क नहीं करना चाहिये. उन्हे टीम की कमियों को उजागर करके उन्हे पूरा करना चाहिए. पिच का अनुमान लगाकर सलामी जोड़ी, मध्य क्रम और गेंदबाजी विभाग तय करना मैनेजमेंट के जिम्मे आता है. गावस्कर ने यह भी कहा कि 4-1 की हार दर्शाती है कि कई मुख्य मौकों पर हम झेल का रुख बदलने में नाकाम हुए.

यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाते हुए रवि शास्त्री पर भी दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड दौरे की हार का दबाव रहेगा. मुकाबले में हार के बाद कई लोगों ने कोच पर भी उंगलियां उठाई थीं क्यूंकि उन्होने अपनी टीम को विदेशी दौरों पर सबसे अच्छी भारतीय टीम करार दिया था.

गावस्कर ने कहा कि पिछले तीन वर्षो में भारत ने तीन टेस्ट श्रृंखला और नौ मैच भारत के बाहर जीते हैं. पहले ऐसी कोई भारतीय टीम नहीं थी जिसने इतने कम समय में ये सब किया हो. कोच रवि शास्त्री की टिप्पणी का बचाव करते हुए कोहली ने भी कहा था कि, “यदि हम यह मानते हैं कि हम बेस्ट हैं तो इसमे गलत क्या है?”