द्विपक्षीय शृंखला में कुछ बड़ा नहीं,
इयोन मोर्गन की कप्तानी में, बीते शनिवार को इंग्लैंड टीम ने भारत को 86 रनों से शानदार पटकनी दी. पहला एक दिवसीय हारने के बाद यह दूसरा एकदिवसीय मुकाबला शृंखला जीतने या हारने के लिए बहुत मायने रखता था. इंग्लैंड के कप्तान नें यह कहा कि वे  द्विपक्षीय शृंखला को तभी पसंद करते है जब वह इंट्रेस्टिंग हो.
तीसरा एकदिवसीय मुकाबला मंगलवार को खेला जाएगा, जो शृंखला का आखिरी और निर्णायक मुकाबला होगा. इस मुकाबले को जीतने वाली टीम शृंखला जीत जाएगी.
मार्गन में कहा कि, “मैं द्विपक्षीय शृंखला को कुछ ज्यादा पसंद नहीं करता”.
“पर इस तरह के निर्णायक मुकाबले खेलना काफी जरूरी है”.
“मेरी माने तो त्रिपक्षीय शृंखला, ज्यादा बेहतर है क्योकि उसमें हर मुकाबले में कुछ नया सीखने को मिलता है, और लगभग हर मुकाबले में चुनौती नई होती है.”
शृंखला वर्ल्ड कप डिसाइड नहीं करती, 
मोर्गन नें इस बारें में कुछ खास नहीं कहा,इंग्लैंड की जीत उन्हें नंबर वन रैंकिंग पर ले जाएगी.
उनके अनुसार इन मुकाबलों को वर्ल्ड कप से जोड़ना फिजूल है.
उन्होने कहा कि,” नहीं बिल्कुल नहीं. वर्ल्ड कप का फॉर्मैट बदल चुका हैं अब सभी मुकाबले राउंड रॉबिन में खेले जाते है, तो सभी के पास पर्याप्त समय होता है वापसी का. आप अपने मुकाबले के दिन अच्छा खेलिए केवल. और जीत आपकी. परिस्थितियों के अनुसार कुलदीप अच्छी गेंदबाजी कर सकता है, हमें केवल ध्यान लगाकर खेलना है.”
कुलदीप की गेंदबाजी के बारे में पूछे जाने पर मोर्गन ने कहा कि,” हमने उसके खिलाफ अच्छी शुरुआत की थी. और जितना ज्यादा हम उसे खेलेंगे, उसे खेलने में हमे उतनी ही आसानी होगी. उसके खिलाफ आपको ध्यानपूर्वक खेलना होता है, मुझे लगता है कि जो नें यह भली भांति किया. उसके  स्ट्राइक रोटेट की और शांतिपूर्वक खेला.”
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धोनी की गलती नहीं,
अंत में मोर्गन ने बड़े ही साफ रवैये से धोनी की गलती होने या न होने पर जवाब दिया. महेंद्र सिंह धोनी क्रीज पर जब आए तब, स्कोर 140/4 था. तब 23 ओवर में टीम को 323 का टारगेट पार कराने की दरकार थी.
धोनी में जल्दीबाजी न दिखाते हुए, 59 गेंदों पर 37 रन बनाए. मोर्गन ने भारत में काफी  आई पी एल खेला है और वो कहते है कि, ” भारत जैसे देश में जहां आप इतने ज्यादा दर्शकों के आगे खेलते हैं, तब ऐसी प्रतिक्रियाएं आती रहती है.”
“और जब विपक्षी रन बनाते हैं या विकेट लेते है तब पूरे स्टेडियम में सन्नाटा छा जाता है, और विपक्षी के जितने पर पूरे स्टेडियम खाली हो जाते हैं. “