अप्रत्याशित पारी 

 

रवींद्र जडेजा की अप्रत्याशित और शानदार 86 रनों की पारी से भारत ने रविवार को खेल में वापसी की. हालांकि यह केवल जडेजा ही नहीं थे जिन्होने भारत की मदद की बल्कि, पदार्पण कर रहे हनुमा विहारी भी शानदार लय में नज़र आए. उन्होने दो सत्र बल्लेबाजी की और 56 रन बनाए. उनकी इन पारियों से भारत की खेल में वापसी की उम्मीद बढ़ीं. यह तब और आकर्षक था जब कप्तान कोहली बल्ले से कुछ कर पाने में नाकाम रहे.

भाग्य ने दिया विहारी का साथ 
विहारी की शुरुआत असामान्य रूप से भाग्यशाली रही. उनको स्टुअर्ट ब्रॉड ने एलबीडब्ल्यू आउट कर भी दिया था लेकिन स्टुअर्ट ने अंपायर के फैसले के खिलाफ न जाने की सोची और डीआरएस के लिए अपील नहीं की. उसके बाद उन्हे एक फील्ड अंपायर द्वारा आउट घोषित किया गया था पर उन्होने रिव्यू लिया और बच गए. इंग्लैंड के गेंदबाजों की धारदार गेंदबाजी के बावजूद विहारी ने अपना विकेट बचा कर रखा. विहारी गुली की ओर से बैट निकालते हैं जिस कारण वे स्विंग को काट पाते हैं.

मानसिक क्षमता से लबरेज 

 

विहारी की तकनीक उतनी शानदार नहीं है पर वे मानसिक रूप से सक्षम है और विकेट आसानी से गवाना पसंद नहीं करते. खेल के दिन धूप काफी तेज थी जिस कारण इंग्लिश गेंदबाजों को काफी मेहनत करनी पड़ी. विहारी पैरों का उतना अच्छा प्रयोग नहीं करते पर उन्होने केवल शरीर के पास की गेंदे खेलीं और दूर की गेंदों को जाने दिया.

 

विहारी का जल्दीबाजी न दिखाना, किसी भी आईपीएल टीम का हिस्सा ना होने का परिणाम है. विहारी ने हैदराबाद की ओर से 2013 और 2015 में आईपीएल खेला था. पर उनकी टेस्ट मानसिकता के कारण उन्हे फिर आईपीएल में स्थान नहीं मिला. उनका घरेलू औसत 59.79 का है जो मौजूदा खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा का है. उन्होने अपनी बल्लेबाजी से और सब्र दिखाकर सभी को लुभाया. उन्होने अपनी पारी से भारत को वापसी का मौका दिया है. अब यह मैनेजमेंट का दर्शनीय फैसला होगा कि क्या वे इस युवा खिलाडी को आगे मौके देते हैं या नहीं.