बीते दिन मोहम्मद शमी के लिए काफी खराब साबित हुए थे, चोटों और , निजी जीवन की उथल पुथल के चलते उन्होने कई सारे मुकाबले मिस किये और जो इक्का दुक्का मैच उन्होने खेले भी उसमें भी उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं था.   पर एक सच्चे खिलाड़ी की तरह मोहम्मद शमी नें नेट्स में खूब पसीना बहाकर, कमर कस ली है वापसी करने के लिए. बीते दिनों उन्होने यो-यो फ़िटनेस टेस्ट को पास किया, और शमी के रूप में बीसीसीआई के पास एक और गेंदबाजी विकल्प आ गया.

शमी टेस्ट मैचों में काफी किफायती गेंदबाज साबित होते हैं. उन्होने 30 मुकाबलों में कुल 110 विकेट चटकाए है, जोकि एक सराहनीय प्रदर्शन है. उनकी गेंदबाजी की सबसे खास बात है उनकी लाइन लेंथ और जिस तरह से वो गेंद का टप्पा रखते है, उसे पार कर पाना हर बल्लेबाज के बस की बात नहीं.

क्या शमी का चुनाव सही है :-

शमी को काबिलियत को देखते हुए यह कहना काफी हद तक सही है कि वे इंग्लैंड में भारतीय टीम के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते है. वो लंबे लंबे स्पैलस बड़ी आसानी से, अनुशासन से निकालने में माहिर तो हैं ही, इसके साथ वो रिवर्स स्विंग की स्थिति में भी काफी ज्यादा मददगार साबित हो सकते हैं.

खिलाड़ियों को निकाले जाने के बाद, कई ओर से कई तरह के विकल्प सामने आये हैं. एच सी ए के सेक्रेटरी नें इसपर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “ये काफी एकतरफा और अजीब सा है, कि एक खिलाड़ी जिसने लगभग आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाये थे, और डोमेस्टिक क्रिकेट में पचास ओवर के भी कई मुकाबले खेले थे, वो अचानक ख़ुद को राष्ट्रीय स्तर के फिटनेस टेस्ट में अनफिट पाता है. मुझे लगता है कि टेस्ट की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिये.”

जब आखिरी बार मोहम्मद शमी नें भारत के लिए खेला था, तब वो साउथ अफ्रीका सिरीज़ का आखिरी मुकाबला था. ये सिरीज़ जनवरी में खेली गई थी, और मोहम्मद शमी का भारत की जीत में शानदार योगदान था. शमी भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले गेंदबाज थे, और उन्होने अपने प्रदर्शन से भारत को जीत की दहलीज पार कराई थी.