अंतिम टेस्ट मैच से पहले, शास्त्री ने अपने बयान में शॉट सिलेक्शन, आत्मविश्वास और मानसिक तनाव का जिक्र किया लेकिन जैसे जैसे प्रेस कॉन्फ्रेंस आगे बढ़ी, वे शिकायत करने वाले शास्त्री से प्रेरित करने वाले शास्त्री बन गये. मौजूदा टेस्ट सीरीज में उन्होने भारतीय टीम के प्रदर्शन के प्रति निराशा जाहिर की, पर उन्होने कुछ तथ्य भी रखे जिससे क्रिटिकस का मूह बंद किया जा सके.

 

उन्होने भारतीय टीम का बचाव करते हुए कहा कि, कोई और भारतीय टीम नहीं, जिसने पिछले 15-20 सालों में इतने ज्यादा मुकाबले जीते हों. भारतीय टीम ने दो शृंखला श्रीलंका में जीती, एक वेस्ट इंडीज में और एक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक मुकाबला जीता. पर सवाल यह है कि, भारत ने अपनी आखिरी शृंखला सेना(दक्षिण अफ्रीका – इंग्लैंड – न्यूज़ीलैंड – ऑस्ट्रेलिया) टीमों के खिलाफ, 2009 में जीती थी. जब भारत न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 1-0 से तीन मुकाबलों की शृंखला जीत कर आया था, तो वे इतिहास कब बदलेंगे?

Ravi Shastri Image Credit: @Reuters

शास्त्री के अनुसार कोहली की कप्तानी में, भारतीय टीम ने आत्मविश्वासी होना सीखा है, और हारे हुए मुकाबलों में कोई भी एक तरफा नहीं था.

 

“मेरे अनुसार हमें मानसिक रूप से मजबूत होना पड़ेगा. हमने विदेशी सरजमीं पर कई टीमों को चुनौती दी है और हम बेहद नजदीक से गुजरे हैं. अब केवल चुनौती देने से कुछ नहीं होगा. हमें यहां से खेल जीतने होंगे. हमें यह समझ तो आ ही गया है कि हमारी गलतियां कहा थीं, अब गलतियों पर विचार कर उन्हे सुधारने का वक़्त है. अब हमारे पास मौका है और हम उसका सदुपयोग करेंगे. “

 

“रवि शास्त्री ने आगे कहा कि,”स्कोर लाइन अब 3-1 ही चुकी है, यानी कि भारत सीरीज हार चुका है, पर इसका ये तो मतलब बिल्कुल भी नहीं की भारत 2-2 नहीं हो सकता था. मेरी टीम जानती है कि चौथे मुकाबले की हार के बाद से हम सभी को बुरा लगा है. पर मेरी टीम पांचवे मुकाबले में हार नहीं मानेगी. हम मैदान पर जाएंगे उन्हे चुनौती देंगे, हम पहली फ्लाइट से घर नहीं जाने वाले, हम जानते है कि हम क्या करने वाले हैं. “

 

सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग ने टीम के सपोर्टिंग स्टाफ पर निशाना साधा. उन्होंने हार का जिम्मेदार रवि शास्त्री और संजय बांगर को ठहराया. उन्होने कहा कि, अगर सपोर्टिंग स्टाफ टीम की मदद नहीं करेगी तो हार तो तय है.