तीन मुख्य बदलाव जो भारत को करने होंगे विश्व कप 2019 से पहले

भारत बनाम इंग्लैंड | भारत बनाम इंग्लैंड – बड़ी सीख

 

एकदिवसीय क्रिकेट मे भारत की जीत का सफर, कल इंग्लैंड के हाथों एकदिवसीय श्रंखला हारने के बाद रुक गया है. कल लीड में निर्णायक मुकाबले मे भारत को कराई परास्त का सामना करना पड़ा. यह जनवरी 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हारने के उपरांत, भारत की पहली द्विपक्षीय श्रंखला में परास्त थी. और विराट कोहली की कप्तानी में पहली हार. (लगातार आठ श्रंखला जीतने के बाद) मोटे तौर पर देखा जाए तो हार से यह सीखने को मिल सकता है कि आखिर भारत को किस तरह का सेटअप चाहिए, विश्व कप से पहले. पिछले कुछ समय से भारत ने सफेद गेंद क्रिकेट में अपनी पैठ खोई है. और सभी का मानना है कि यही वक़्त है जब टीम की अच्छाई और बुराई पर नज़र डाली जाय.
इस आर्टिकल में मैं आपको बताउंगी उन तीन मुख्य चीजों के बारे मे जिनपर भारतीय टीम को काम करना पड़ेगा.

 

कुछ इस तरह है मेरी राय :

 

1) तेज गेंदबाजी मे विकल्प 
ऑस्ट्रेलिया मे भारत की हार के बाद, तीस महीनो तक विजय अभियान का हिस्सा रहे,पारी ओपन करने वाले भुवनेश्वर और जसप्रित पर काफी भार है. यह जोड़ी कोहली को मैच की शुरुआत मे ही विकेट मुहैया करा देगी जिससे स्पिन गेंदबाजों को आगे दबाव बनाने मे मदद मिलेगी. पिछली एकदिवसीय  श्रृंखला जो कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्ही की जमीन पर खेली गई थी, उसमें इसी रणनीति के तहत कुलदीप और चहल की स्पिन जोड़ी ने सबसे ज्यादा विकेट चटकाए थे. कुलदीप ने 17 और चहल के हाथ 16 विकेट आए थे, जस्प्रिट तेज गेंदबाजी मे सबसे किफायती रहे.
भुवनेश्वर और बुमराह  की सफलता के बाद, भारत ने और किसी तेज गेंदबाज को लगभग नहीं आजमाया. मोहम्मद सामी और उमेश यादव जैसे गेंदबाज लगभग बाहर ही बैठे रहे. उन्हे ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े विपक्षी के खिलाफ भी नहीं खिलाया गया.

 

भारतीय टीम का तेज गेंदबाजी को न मजबूत करना, उस वक़्त बिल्कुल खराब साबित हुआ, जब बूमराह ने खुद को चोटिल कर लिया. बूमराह के टीम से बाहर होने के बाद भारत ने शार्दुल ठाकुर और दीपक चाहर जैसे गेंदबाज भी आजमाए. पर इनमे से कोई भी टीम से खेलने की और इतनी बड़ी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं था. यह इस बात का संकेत है कि भारत को आने वाले दिनों में अपनी तेज गेंदबाजी पर ध्यान देना होगा, तभी वे विश्व कप में कुछ अच्छा करने की उम्मीद रख सकते हैं.

 

2) निचला मध्य क्रम 

 

बीते सालो मे यह साफ निकल कर आया है कि पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अब उस तरह की बल्लेबाजी और फिनिश नहीं कर पा रहे जिस तरह वे अपने शुरुआती दिनों में किया करते थे. उम्र का तकाजा धोनी पर साफ नज़र आता है, और टीम मैनेजमेंट उन्हे नंबर पांच से नीचे उतारने का सोच भी नहीं सकती. धोनी को अपने साथी बल्लेबाज जैसे नंबर 4 और नंबर 6 से भी कोई साझेदारी का मौका नहीं मिल रहा. पिछले मैच में वे जब बल्लेबाजी करने आए तभी तुरंत भारत मे विराट का विकेट खो दिया और उसी ओवर में रैना भी चलते बने. सुरेश रैना को टीम में शामिल करने का मुख्य कारण यही था कि जब मुख्य गेंदबाजी की लय खराब हो तब वे एक सहायक गेंदबाज की भूमिका अदा कर सकें. गौरतलब है कि रैना ने आईपीएल में एक भी ओवर नहीं फेंका था. रैना ने एक बल्लेबाज के तौर पर भी अपनी कोई छाप नहीं छोड़ी. मुश्किल समय पर उन्होने अपना विकेट गवां दिया.
क्या रैना उम्दा विकल्प है निचले मध्य क्रम मे बल्लेबाजी करने के लिए? जवाब है बिल्कुल नहीं, और कोहली कुणाल पांड्या, दिनेश कार्तिक, या हार्दिक पंड्या को इस जगह पर उतार सकते हैं.

 

3) नंबर चार की दुविधा 

 

दस से ज्यादा बल्लेबाजों को नंबर 4 पर खिलाने के बावजूद भारत के पास अबतक कोई पुख्ता हल नहीं आया है इस जगह के लिए. जहां युवराज सिंह को चैम्पियन ट्राउफी में खिलाया गया था, वही अजिंक्य रहाणे और मनीष पांडे को दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर इस स्थान पर जगह मिली थी. अभी हाल ही में इंग्लैंड दौरे पर दिनेश कार्तिक और के एल राहुल को भी इस जगह ट्राई किया गया था. गौरतलब है कि इतना सब करने के बावजूद  अबतक भारत को इस समस्या का कोई हल नहीं मिला. मेरी राय में इस समस्या के दो हल हैं.

 

*अगर भारत राहुल को खिलाना चाहता है तो उन्हे उपरी क्रम में ही खिलाना पड़ेगा. भारत में टी20 में यह दिखाया था कि विराट ने अपना क्रम छोड़कर, राहुल को अपनी जगह दी थी. मेरी नज़र में विराट को अब ऐसा एकदिवसीय क्रिकेट में भी करना होगा. नंबर चार पर बल्लेबाजी करते हुए विराट पारी को अपने हिसाब से संभाल सकते है, कब पारी को गति देनी है और कब उसे धीमा करना है, यह सब विराट नंबर चार पर रहते हुए कर सकते हैं. कोहली के लिए यह नया क्रम नहीं है, वे पहले भी इस स्थान पर बल्लेबाजी कर चुके हैं. उन्होने इस स्थान पर खेलते हुए, 37 पारी में 58.13 की औसत और 90.41 के स्ट्राइक रेट से 1744 रन बनाए हैं.
*दूसरा हल यह हो सकता है कि यदि विराट अपना क्रम नहीं छोड़ते तब अंबाती रायडू को टीम में मध्य क्रम में जगह दी जा सकती है. रायुडू ने अबतक  30 एकदिवसीय मैच में 50 की औसत से रन बनाए हैं, और इस वर्षा के आईपीएल में भी उनका प्रदर्शन जबर्दस्त था.

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