मुंबई में जन्मे और पले – बढ़े सौरभ नेत्रावलकर को 2010 के अंडर 19 क्रिकेट वल्ड कप में किये बेहतरीन प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। तेज़ गेंदबाज़ रहे सौरभ ने 2010 के अंडर 19 वल्ड कप में भारत की ओर से खेलते हुए 9 वीकेट लिए थे। उस साल भारत की ओर से सौरभ ने ही सबसे अधिक वीकेट लिए थे।

 

2010 में किये कमाल के बाद सौरभ के भारतीय टीम में भी आने के कयास लगाए जाने लगे थे लेकिन फिर इनकी ज़िंदगी ने एक नया मोड़ लिया और अब 27 साल के सौरभ अमेरिका क्रिकेट टीम के कप्तान बन गए हैं।

 

क्रिकेट को छोड़ पढ़ाई की तरफ मुड़े

2010 U-19 वल्ड कप में इन्होंने जॉय रूट और पाकिस्तान के ओपनर अहमद शहज़ाद जैसे खिलाड़ियों का वीकेट चटकाय था। 2010 में किए बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद सौरभ को उनके उम्मीद के मुताबिक क्रिकेट में मौके नही मिले। 2010 के बाद इन्हें पहला फर्स्ट क्लास मैच 2013 में खेलने को मिला था। मुंबई की ओर से कर्नाटक के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने 3 वीकेट लिए थे। इसके बाद फिर इन्हें आगे मौका नही मिल सका।

उम्मीद के मुताबिक मौके नही मिलने के कारण सौरभ ने क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद पढ़ाई की ओर मुड़े और इन्होंने आगे की पढ़ाई करने के लिए अमेरिका जाने का फैसला किया। 2015 में मास्टर डिग्री के लिए कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू कर दी।

 

 

पढ़ाई के साथ जारी रहा क्रिकेट प्रेम

पढ़ाई करते हुए ही सौरभ छुट्टी के दिन क्रिकेट खेलने जाने लगे। पढ़ाई के बाद इन्हें सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में ऑरेकल कंपनी में नौकरी भी मिल गयी इसके बाद भी क्रिकेट के प्रति इनका जुनून कम नही हुआ और ये काम के साथ क्रिकेट भी खेलते रहें।

 

धीरे धीरे क्रिकेट के मैदान पर सौरभ एक बार फिर से अपने रंग में लौटने लगे और जल्दी ही सिलेक्टर्स की नज़रों में भी आ गए। 31 जनवरी 2018 को इन्होंने अमेरिका की ओर से बतौर तेज़ गेंदबाज़ पहला अंतराष्ट्रीय मैच खेला।

इसके बाद इनके प्रदर्शन को देखते हुए अब इन्हें अमेरिकी टीम की कमान ही सौंप दी गयी है। बतौर कप्तान अब सौरभ अगले हफ़्ते आईसीसी क्रिकेट लीग डिवीजन 3 टुर्नामेंट के लिये ओमान के दौरे पर होंगे।