पूर्व भारतीय कप्तान अजित वाडेकर, जिनकी कप्तानी में भारत ने अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती थी, उनका गुरुवार को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया. गौरतलब है कि वे काफी समय से बीमार थे.

 

वाडेकर एक दिग्गज कप्तान थे, उन्होने भारत को उस वक़्त की सबसे मजबूत टीम वेस्ट इंडीज और इंग्लैंड पर जीत दिलाई थी. वाडेकर का पदार्पण 1966 में हुआ था और उन्होने 2 एकदिवसीय और 37 टेस्ट मैच खेले थे.

 

उन्होने कुल 2113 रन बनाए थे, जिसमें उनकी औसत 31.07 थी और उन्होने कुल 14 अर्ध शतक लगाये थे.

 

बाएँ हाथ के बल्लेबाज को सन् 1971 की शुरुआत में कप्तानी सौंपी गई थी और फिर उन्होने अपनी कप्तानी में कई मुकाम हासिल किये. उनकी कप्तानी में जब भारत ने इंग्लैंड का दौरा क्या तब पहले दो मैच ड्रॉ हुए और तीसरे मैच में भारत ने लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत हासिल की. 173 रनों के लक्ष्य का पीछा करने में वाडेकर ने उपयोगी 45 रन बनाये थे और बीसी चंद्रशेखर ने 6 विकेट लेकर 38 रन दिये थे. यह भारत की पहली सीरीज जीत थी.

 

वाडेकर ने बताया कि कैसे उन्होने नवाब से कप्तानी ली. उन्हे इस बात तक का यकीन नहीं था कि उन्हे टीम में चुना जायेगा. उन्होने इंग्लैंड दौरे से पहले पटौदी से कहा था कि कृपया मुझे टीम में रख लें. पटौदी ने उन्हे कहा कि वे सिर्फ चुने ही नहीं गए बल्कि वे वहां कप्तानी भी करेंगे. फिर उन्होने वेस्ट इंडीज जाकर सीरीज जीती.

 

वाडेकर बाद में भारत के पहले एकदिवसीय कप्तान बने, और सन्यास के बाद उन्होने मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में टीम मैनेज भी की. उसके बाद वे चुनाव समिति के अध्यक्ष बने. दुखद घटना ने सभी को निराशा में डाल दिया. उनके क्रिकेट के प्रति किए गए काम एतिहासिक हैं. सभी के साथ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद.

 

शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा. 

जसोला अस्पताल ने प्रेस रिलीज में बताया कि, ” वे काफी समय से ठीक नहीं थे, और आज यह दुखदायी घटना घटित हुई.”